ऊष्मागतिकी साम्य क्या है, यान्त्रिकी, रासायनिक व तापीय साम्य को समझाइए | Thermodynamics Equilibrium in Hindi

ऊष्मागतिकी साम्य क्या है

यदि किसी विलगित निकाय के ऊष्मागतिकी निर्देशकों को समय के साथ मापा जाए तो किसी बिंदु पर दाब व ताप एक स्थायी अवस्था को प्राप्त कर लेते हैं। तथा समय के सापेक्ष अपरिवर्तित रहते हैं। ऐसी स्थिति में जब निकाय का ताप व दाब अपरिवर्तित रहता है। तब निकाय को ‘ऊष्मागतिकी साम्य’ में कहा जाता है। यदि कोई ऊष्मागतिकी निकाय साम्यावस्था में तब कहा जाता है जब वह निम्न प्रतिबन्धों को संतुष्ट करें। तथा इसके तीन प्रतिबंध होते हैं।
1.यान्त्रिक साम्यावस्था (Mechanical Equilibrium in Hindi) निकाय यान्त्रिक साम्यावस्था में होना चाहिए अर्थात् निकाय के विभिन्न भागों के बीज तथा निकाय एवं परिवेश के बीच कोई असन्तुलित बल आरोपित नहीं होना चाहिए।
2.रासायनिक साम्यावस्था (Chemical Equilibrium in Hindi) निकाय रसायनिक साम्यावस्था में होना चाहिए अर्थात् निकाय का रासायनिक संगठन नियत रहना चाहिए।
3.तापीय साम्यावस्था (Thermal Equilibrium in Hindi)निकाय तापीय साम्यावस्था में होना चाहिए अर्थात् निकाय के प्रत्येक भाग का ताप एक समान तथा परिवेश के ताप के तुल्य होना चाहिए।

और पढ़ें.. ऊष्मागतिकी क्या है? निम्न पर टिप्पणी लिखिए। (Thermodynamics in Hindi)

यान्त्रिक कार्य क्या है

ऊष्मागतिकी में निकाय द्वारा या निकाय पर किए गए कार्य का अर्थ निकाय तथा परिवेश के बीच, ऊर्जा व ऊष्मा के आदान-प्रदान या विनिमेय के रूप में व्यक्त होता है। यदि ऊष्मागतिकी निकाय पर बल \overrightarrow{F} आरोपित किया जाने पर निकाय में उत्पन्न अल्प विस्थापन \overrightarrow{δX} हो, तब निकाय पर कृत कार्य
δW = \overrightarrow{F} . \overrightarrow{δX}
यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि निकाय द्वारा परिवेश पर आरोपित किए जाने पर विस्थापन उत्पन्न हो, तो कार्य निकाय द्वारा किया जाता है परन्तु यदि परिवेश द्वारा निकाय पर बल आरोपित करने से विस्थापन उत्पन्न होता है, तो कार्य निकाय पर किया जाता है। अतः निकाय पर किए गए कार्य को धनात्मक (+) तथा निकाय पर किए गए कार्य को ऋणात्मक (-) लिया जाता है तो इस प्रक्रिया में किए गए कार्य को ‘बाह्य कार्य’ कहा जाता है। यदि निकाय के एक भाग द्वारा उसी निकाय के द्वितीय भाग पर कार्य किया जाए, तो इस प्रकार के कार्य को आन्तरिक कार्य कहा जाता है। यदि गैस में प्रसार हो, तो अन्तराण्विक आकर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य “यान्त्रिक कार्य” कहलाता है।
माना कि A अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के बेलन में गैस भरी है तथा बेलन में पिस्टल लगी है। यदि पिस्टन द्वारा दाब P आरोपित हो, तो गैस पर आरोपित बल
F = दाब × क्षेत्रफल = PA
पिस्टन के δX विस्थापन होने में कृत कार्य
δW = F.δX
δW = PA.δX
δW = P. δX ….(1)
यदि गैस के आयतन में परिवर्तन V1 से V2 तक हो, तो कृत कार्य
W = \int^{V_2}_{V_1} P.dV ….(2)

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पढ़ें… प्रशीतित्र क्या है? प्रशीतलन चक्र क्या होता है? कार्यगुणांक और दक्षता में संबंध (Refrigerator in Hindi)

तापीय साम्य क्या है

किसी ऊष्मीय निकाय को तापीय साम्य तब कहा जाता है जब निकाय के प्रत्येक भाग का ताप एक ही होता है। तथा यह परिवेश के ताप के तुल्य होता है। यदि ताप असमान है, तो अवस्था परिवर्तन तब तक ही रहता है जब तक कि निकाय तापीय साम्यावस्था को प्राप्त न कर ले।

समतापी प्रक्रम क्या है

जब किसी निकाय की अवस्था में परिवर्तन इतना धीरे-धीरे होता है कि निकाय तथा उसके परिवेश के बीच ऊष्मा का विनिमय हो सके तथा निकाय का ताप स्थिर बना रहे, तब इस प्रकार सम्पन्न प्रक्रम को ‘समतापी प्रक्रम (Isothermal Process in Hindi)’ कहते हैं। आदर्श गैस के समतापी परिवर्तन के लिए,
P.V = नियतांक ….(3)

रुद्धोष्म प्रक्रम क्या है

जब किसी निकाय की अवस्था में परिवर्तन इतनी तीव्र गति से होता है कि निकाय तथा उसके परिवेश के बीच ऊष्मा का विनिमय न हो सके तथा जिससे निकाय का ताप बदल जाए, तो इस प्रकार सम्पन्न प्रक्रम को ‘रुध्दोष्म प्रक्रम (Adiabatic process in Hindi)’ कहते हैं। इस प्रक्रम के लिए निकाय की परिसीमाओं का पूर्णतः ऊष्मारोधी होना आवश्यक होता है। आदर्श गैस के रुध्दोष्म परिवर्तन के लिए,
P.Vγ = नियतांक ….(4)
यहां γ = गैस की दो विशिष्ट ऊष्माओं की निष्पत्ति = \frac{C_P}{C_V}

और पढ़े.. ऊष्मागतिकी का शूनयवां नियम

Note – समतापी तथा रुद्धोष्म प्रक्रम में अंतर समझाइए ?

समतापी तथा रुद्धोष्म प्रक्रम में अंतर

समतापी प्रक्रम – यदि ऊष्मागतिकी निकाय में इस प्रकार परिवर्तन किया जाता है। कि सम्पूर्ण प्रक्रम में निकाय का ताप नियत रहता है, तो यह प्रक्रिया समतापी प्रक्रम कहलाती है। जैसे
T = नियतांक

रुद्धोष्म प्रक्रम – यदि ऊष्मागतिकी निकाय में इस प्रकार परिवर्तन किया जाता है कि सम्पूर्ण प्रक्रम में निकाय तथा वातावरण के मध्य ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं किया जाता है, तो यह प्रक्रिया रुद्धोष्म प्रक्रम कहलाती है।
इस प्रक्रम में निकाय की एण्ट्रॉपी नियत रहती है। जैसे –
S = नियतांक

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 निम्न पदों को समझाइए –
ऊष्मागतिकी साम्य, तापीय साम्य तथा यान्त्रिक कार्य क्या हैं निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए ?
Q.2 ऊष्मागतिकी साम्यावस्था क्या है ? यह कितने प्रकार की होती है। समझाइए ?
Q.3 समतापी तथा रुद्धोष्म प्रक्रम को समझाइए ?
Q.4 समतापी तथा रुद्धोष्म प्रक्रमों में क्या अंतर होते हैं ? समझाइए ?

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