ऊष्मागतिकी क्या है, निम्न पर टिप्पणी लिखिए | Thermodynamics in Hindi

ऊष्मागतिकी क्या है

ऊष्मागतिकी, भौतिक विज्ञान की वह शाखा है “जिसके अंतर्गत ऊष्मीय ऊर्जा, कार्य एवं इनके पारस्परिक रूपांतरण का अध्ययन किया जाता है। तो इसे ऊष्मागतिकी (Thermodynamics in Hindi) कहते हैं।” तथा वर्तमान में ऊष्मागतिकी के क्षेत्र में व्यापक वृद्धि हुई है। अतः ऊष्मागतिकी का क्षेत्र यान्त्रिक ऊर्जा अथवा कार्य तक सीमित नहीं है। अपितु ऊर्जा के विभिन्न रूप हैं। जैसे- रासायनिक ऊर्जा, विद्युत् ऊर्जा एवं चुंबकीय ऊर्जा तक विस्तृत है।

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ऊष्मागतिकी निर्देशांक एवं ऊष्मागतिकी निकाय

यदि जब किसी पदार्थ की मात्रा को किसी बंद वक्र से घिरी हो, तब एक निकाय की रचना होती है। उदाहरण के लिए, किसी गतिशील पिस्टनयुक्त बेलन में भरी हुई गैस या वायु अथवा साइकिल के टायरों में भरी हुई हवा एक निकाय है। अर्थात् किसी निकाय को चारों ओर से वास्तविक दीवारें या काल्पनिक गणितीय पृष्ठ घेरे रहते हैं। जिन्हें परिवेश कहा जाता है किसी निकाय का परिवेश वास्तविक या काल्पनिक दोनों प्रकार का सम्भव हो सकता है। यह दृढ़ या परिवर्ती सम्भव हो सकता है। स्पष्ट है कि किसी द्रव का वह परिमित भाग जिसे प्रत्येक वस्तु से पृथक् रखा जाये, तो वह निकाय कहलाता है। तथा निकाय के बाहर का वह भाग जिसके द्वारा निकाय की ऊर्जा का आदान-प्रदान हो सके तथा निकाय के व्यवहार को प्रभावित कर सके, तो वह निकाय का परिवेश कहलाता है।
यदि कोई निकाय अपने परिवेश से किसी भी प्रकार प्रभावित न हो, तो ऐसे निकाय को ‘विलगित निकाय’ कहते हैं। यदि निकाय द्वारा परिवेश से होकर द्रव्य, ऊर्जा दोनों का आदान-प्रदान होता है, तो इस निकाय को ‘विवृत निकाय या खुला निकाय (open system)’ कहते हैं। यदि निकाय द्वारा परिवेश से होकर, केवल ऊर्जा का ही आदान-प्रदान होता है, तो उस निकाय को ‘संवृत निकाय या बन्द निकाय (closed system)’ कहते हैं।

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किसी निकाय की अवस्था या स्थिति को प्रदर्शित करने के लिए कुछ चर राशियों की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए यान्त्रिकी में किसी वस्तु की अवस्था को उसकी स्थिति, वेग, त्वरण, संवेग तथा द्रव्यमान केंद्र आदि के द्वारा व्यक्त किया जाता है।
“ऊष्मागतिकी में हम उन राशियों की कल्पना करते हैं, जो निकाय के आन्तरिक गुणों को प्रदर्शित कर सकें। इन राशियों को ‘ऊष्मागतिकी निर्देशांक’ कहा जाता है। जैसे- सामान्यतः दाब P, आयतन V तथा परम ताप T ऊष्मागतिकी निर्देशांक हैं। इनके अतिरिक्त एण्ट्रॉपी S को भी ऊष्मागतिकी निर्देशांक चुना जाता है।
अर्थात् वह निकाय जिसका वर्णन ऊष्मागतिकी निर्देशांकों P, V, T तथा S के रूप में किया जा सके, तो उस निकाय को ‘ऊष्मागतिकी निकाय’ कहते है।”

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प्रावस्था समीकरण क्या है

वह समीकरण जो साम्यावस्था में किसी ऊष्मागतिकी निकाय के विभिन्न ऊष्मागतिकी निर्देशांकों के बीच संबंध को व्यक्त करता है, तो उसे प्रावस्था समीकरण कहते हैं। गैसीय निकाय के लिए दाब P, आयतन V एवं परम ताप T ऊष्मागतिकी निर्देशांक लिए जाते हैं जिनके बीच संबंध को निम्न फलन के रूप में व्यक्त करते हैं।
f(P, V, T) = 0 …..(1)
प्रत्येक ऊष्मागतिकी निकाय का अपना पृथक् प्रावस्था समीकरण होता है। जो तभी सत्य है जब निकाय साम्यावस्था में हो।
उदाहरण के लिए, आदर्श गैस का समीकरण
PV = RT …..(2)
तथा वंडरवॉल गैस का समीकरण
(P + \frac{a}{V^2} )(V – b) = RT
इन समीकरणों से व्यक्त किया जाता है। तब बर्तन में एक मोल गैस ली जाती है। अर्थात् यहां प्रतीकों का सामान्य अर्थ है।

उत्क्रमणीय प्रक्रम क्या है

“वह प्रक्रम है, जिसको उल्टे क्रम में उसी अवस्था में सम्पन्न किया जाता है जिस अवस्था में सीधे क्रम में सम्पन्न किया जाता है।”
जैसे यदि कार्यकारी द्रव dq में ऊष्मा अवशोषित करके dW कार्य किया जाता है, तो विपरीत क्रम में यदि dW कार्य कार्यकारी द्रव पर करने पर dq ऊष्मा प्राप्त हो जाए, तो प्रक्रम उत्क्रमणीय होगा।
उत्क्रमणीय प्रक्रमों के उदाहरण –
1.समान तापों की दो वस्तुओं में ऊष्मा का स्थानांतरण,
2.स्प्रिंग को धीरे-धीरे खींचना।

अनुत्क्रमणीय प्रक्रम क्या है

“वह प्रक्रम है जिनको उल्टे क्रम में उन्हीं अवस्था में सम्पन्न नहीं किया जाता है, जिस अवस्था में सीधे क्रम में सम्पन्न किया जाता है।”
अनुत्क्रमणीय प्रक्रमों के उदाहरण
1.घर्षण द्वारा ऊष्मा का उत्पादन,
2.जूल-थॉमसन प्रभाव तथा
3.विद्युत् प्रतिरोध का गर्म होना।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 निम्न पदों को समझाइए –
ऊष्मागतिकी, ऊष्मागतिकी निर्देशांक एवं ऊष्मागतिकी निकाय, प्रावस्था समीकरण निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए ?
Q.2 ऊष्मागतिकी की परिभाषा क्या है ? तथा ऊष्मागतिकी निर्देशांक निकाय को उदाहरण सहित समझाइए ?
Q.3 ऊष्मागतिकी का प्रावस्था समीकरण क्या है ?
Q.4 उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम क्या है ? उदाहरण सहित समझाइए?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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