थेवेनिन प्रमेय का सिद्धांत क्या है, परिभाषा सूत्र तथा सीमाएं लिखिए | Thevenin’s theorem in Hindi

थेवेनिन का प्रमेय क्या कहता है? – इस प्रमेय के अनुसार, अनेक विद्युत वाहक बल स्त्रोत तथा प्रतिबाधाओं को जोड़कर बनाए गए जटिल नेटवर्क के स्थान पर एक सरल समतुल्य वोल्टेज जनरेटर को मान सकते है। अतः इस अध्याय में हम आपको थेवेनिन प्रमेय के बारे में विस्तार से समझाएंगे।

थेवेनिन प्रमेय का सिद्धांत

इस प्रमेय के अनुसार, “अनेक जनरेटरों अथवा विद्युत वाहक स्त्रोतों तथा रेखीय प्रतिबाधाओं से बने नेटवर्क के दोनों टर्मिनलों के बीच जुड़े लोड प्रतिबाधा में वही धारा होती है जो कि उस लोड प्रतिबाधा को उस अकेले वोल्टेज जरनेटर से जुड़े होने पर होती है जिसका विद्युत वाहक बल खुले परिपथ में नेटवर्क के दोनों टर्मिनलों के बीच वोल्टेज के बराबर होता है। तथा जिसकी आन्तरिक प्रतिबाधा टर्मिनलों के बीच नेटवर्क की उस प्रतिबाधा के बराबर होगी, जबकि नेटवर्क में सभी जनरेटरों के स्थान पर उनकी आन्तरिक प्रतिबाधायें मानी जाती है।”

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थेवेनिन प्रमेय का उद्देश्य क्या है

रेखीय प्रतिबाधाओं तथा अनेक विद्युत वाहक स्त्रोतों से निर्मित दो टर्मिनलों वाले रेखीय नेटवर्क को एक समतुल्य परिपथ से ‘प्रतिस्थापित’ किया जा सकता है। जिसमें एक वोल्टेज स्त्रोत V तथा उसके श्रेणी क्रम में एक प्रतिबाधा Zeq जुड़ी हो, जहां V को ‘थेवेनिन समतुल्य वोल्टेज’ कहते हैं जो खुले परिपथ में टर्मिनलों के बीच वोल्टेज है तथा प्रतिबाधा Zeq को ‘समतुल्य प्रतिबाधा’ कहते हैं जो नेटवर्क के टर्मिनलों पर रेखीय नेटवर्क की प्रतिबाधा है।अर्थात्
जबकि सभी आन्तरिक स्त्रोतों को अलग कर दिया गया है। थेवेनिन समतुल्य वोल्टेज की दिशा हम इस प्रकार मानते हैं कि निर्गत टर्मिनलों में जुड़ी प्रतिबाधा में प्रवाहित धारा की दिशा अपरिवर्तित बनी रहती है।

थेवेनिन प्रमेय को समझने के लिए निम्न चित्रों पर विचार करते हैं

जैसा कि चित्र-1 में N1 अनेक जनरेटरों तथा रेखीय प्रतिबाधाओं से निर्मित एक नेटवर्क है जिसके आउटपुट टर्मिनल M व N हैं जिनके सिरों पर एक लोड प्रतिबाधा ZR जुड़ी है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

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थेवेनिन प्रमेय
थेवेनिन प्रमेय

माना M व N के बीच खुला परिपथ वोल्टेज V जो कि उससे धारा नहीं लेता हैं तथा Zeq परिपथ की आन्तरिक प्रतिबाधा है, जबकि सभी स्त्रोतों को उनकी आन्तरिक प्रतिबाधाओं से प्रतिस्थापित कर दिया गया है। अर्थात्
थेवेनिन प्रमेय के नियमानुसार, V समतुल्य वोल्टेज तथा Zeq समतुल्य प्रतिबाधा है। अतः इस प्रमेय के अनुसार नेटवर्क M व N के बीच जुड़ी लोड प्रतिबाधा में उतनी ही धारा प्रवाहित करेगा जितनी V वोल्ट विद्युत वाहक बल का तथा Zeq आन्तरिक प्रतिबाधा का जनरेटर करेगा।

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उपपत्ति

थेवेनिन प्रमेय को सिद्ध करने के लिए, माना तीन प्रतिरोधीय प्रतिबाधाओं Z1, Z2 व Z3 विद्युत वाहक बल E तथा शून्य आन्तरिक प्रतिबाधा ZR के जनरेटरों से बना एक नेटवर्क है। जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

थेवेनिन प्रमेय

माना Z1 में धारा I1 तथा Z2 में धारा I2 है। अतः Z3 में धारा (I1 – I2) है। नेटवर्क के बन्द लूपों के लिए किरचाॅफ के द्वितीय नियम लगाने पर,
I1Z1 + (I1 – I2)Z3 = E …(1)
तथा
I2Z2 + I2ZR – (I1 – I2)Z3 = 0 …(2)
अब समीकरण (2) को हल करने पर,
I1 = \frac{I_2(Z_2 + Z_3 + Z_R)}{Z_3}
अतः I1 का मान समीकरण (1) में रखने पर,
\frac{I_2(Z_2 + Z_3 + Z_R)}{Z_3} (Z1 + Z3) – I2Z3 = E
या I2[(Z2 + Z3 + ZR)(Z1 + Z3) – Z23] = EZ3
अतः
I2 = \frac{EZ_3}{Z_2(Z_1 + Z_3) + Z_1Z_3 + Z_2(Z_1 + Z_3)} …(3)
“लोड प्रतिबाधा ZR में भी यही धारा बहती है।”

अब यदि समीकरण (3) को इस प्रकार लिखें तो
I2 = \frac{EZ_3/(Z_1 + Z_3)}{Z_2 + Z_R + Z_1Z_3/(Z_1 + Z_3)} …(4)
अतः ZR में तब भी उतनी ही धारा होगी। यदि उसे इस जनरेटर से जोड़ दिया जाए जिसका विद्युत वाहक बल V = EZ3/(Z1 + Z3) तथा आन्तरिक प्रतिबाधा,
Zeq = Z2 + \frac{Z_1Z_3}{(Z_1 + Z_3)} …(5)
अब यदि लोड प्रतिबाधा ZR को हटा दें तो Z1 व Z2 में धारा I1 ही होगी। तथा
I1 = \frac{E}{(Z_1 + Z_3)}
तथा Z3 के सिरों पर वोल्टेज,
I1Z3 = \frac{EZ_3}{(Z_1 + Z_3)}
अर्थात् इस अवस्था में Z2 में कोई धारा नहीं है अतः Z3 के सिरों पर वोल्टेज M व N के बीच वोल्टेज V होगा। अतः
V = \frac{EZ_3}{(Z_1 + Z_3)} …(6)
अतः यदि परिपथ से KVL (किरचाॅफ का वोल्टेज नियम) लगाने पर,
I2(Zeq + ZR) = V
या I2 = \frac{V}{(Z_{eq} + Z_R)} …(7)
यदि समीकरण (6) में Zeq तथा V के मान रखने पर,
I2 = \frac{EZ_3/(Z_1 + Z_3)}{Z_R + Z_2 + Z_1Z_3/(Z_1 + Z_3)} …(8)
अर्थात् समीकरण (8) व (4) एकसमान है। अतः “अनेक रेखीय प्रतिबाधाओं तथा जनरेटरों को एक समतुल्य वोल्टेज तथा समतुल्य आन्तरिक प्रतिबाधा के नेटवर्क के तुल्य माना जा सकता है।” इस प्रकार, ‘एक स्त्रोत वाले सम्मिश्र जाल के लिए थेवेनिन प्रमेय स्थापित होती है।’ अर्थात् “यही थेवेनिन प्रमेय कहलाती है।”

थेवेनिन के प्रमेय की सीमाएं क्या है

यदि विभिन्न स्त्रोतों तथा प्रतिबाधाओं से युक्त किन्हीं दो सिरों वाले जाल को एक Eeq विद्युत वाहक बल व Zeq आन्तरिक प्रतिबाधा वाले वोल्टेज जनरेटर के समतुल्य लिया जाए तो Eeq विद्युत वाहक बल का मान दोनों सिरों पर खुले परिपथीय विभवान्तर के तुल्य है तथा Zeq प्रतिबाधा का मान दोनों सिरों से अवलोकित जाल के प्रतिबाधा के तुल्य है जबकि सभी स्त्रोतों को या तो निष्कासित किया जाता है या उनकी आन्तरिक प्रतिबाधाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।

Note – थेवेनिन प्रमेय से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं।
Q.1 थेवेनिन प्रमेय का उल्लेख तथा व्याख्या प्रस्तुत कीजिए तथा इसे प्रमाणित कीजिए?
Q.2 थेवेनिन प्रमेय को लिखिए तथा थेवेनिन समतुल्य वोल्टेज को समझाइए?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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