ट्रांजिस्टर का आयाम माॅडुलेटर के रूप में उपयोग क्यों किया जाता है?

ट्रांजिस्टर का आयाम माॅडुलेटर के रूप में

ट्रांजिस्टर को आयाम मॉडुलेशन के रूप में उभयनिष्ठ उत्सर्जक विधा में प्रयुक्त किया जाता है। pnp ट्रांजिस्टर आयाम माॅडुलेटर के रूप में उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में विद्युतीय परिपथ चित्र-1 दिखाया गया है।

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ट्रांजिस्टर का आयाम मॅाडुलेटर
चित्र-1. ट्रांजिस्टर का आयाम माॅडुलेटर के रूप में

चित्र के अनुसार, दौलित्र से रेडियो आवृत्ति तरंगे तथा श्रव्य तरंगे क्रमशः आधार-उत्सर्जक (B-E) परिपथ में भेजी जाती है। प्रतिरोध R1, R2, Re तथा Rc एवं सप्लाई वोल्टेज – Ecc एम्पलीफायर का कार्यकारी बिन्दु संयोजित करते हैं। माना C2, Cc व Ce संधारित्रों की धारितायें निम्न ली जाती हैं जिससे केवल वाहक तरंगों को ही उपस्थित करते हैं अतः इन्हें उप-पथित भी कहा जाता है।

अर्थात् संधारित्र Cm की निम्न माॅडुलक आवृत्ति तरंगों पर शत-प्रतिशत लगभग नगण्य होता है। तथा DC स्त्रोत Ecc का धनात्मक भाग पृथ्वी से व ऋणात्मक भाग प्रतिरोध R1, R2 व Rc की सहायता से आधार-उत्सर्जक (B-E) को अग्र अभिनत तथा संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) को पश्च अभिनत में रखता है। संग्राहक परिपथों में एक L-C सर्किट भी लगाया जाता है जिसकी अनुनादी आवृत्ति पाशर्व बैण्ड व बैण्ड-चौड़ाई के बराबर रखी जाती है।

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आयाम मॉडुलन में ट्रांजिस्टर का उपयोग क्यों किया जाता है?

चूंकि उभयनिष्ठ उत्सर्जक विधा में वोल्टेज लाभ (अथवा धारा लाभ) कार्यकारी बिंदु के संगत उत्सर्जक धारा पर निर्भर करती है चित्र से स्पष्ट है कि उत्सर्जक धारा के दो भाग हैं –
(i). डीसी स्त्रोत के कारण Ie दिष्ट धारा,
(ii). उत्सर्जक सर्किट में लगाए गए मॉडुलक सिग्नल के कारण Im प्रत्यावर्ती धारा ।

ट्रांजिस्टर का आयाम मॉडुलेटर के लिए व्यंजक

माना कि उत्सर्जक पर आरोपित मॉडुलक सिग्नल em = Emcosωmt हो तो प्रत्यावर्ती धारा,
Im= k1Emcosωmt
यहां k1 एक नियतांक है। माना कुल उत्सर्जक धारा ie हो तो
ie = Ie + k1Emcosωmt …(1)
चूंकि एम्पलीफायर उत्सर्जक धारा के अनुक्रमानुपाती है अतः वोल्टेज लाभ
Av = k2ie = k2(Ie + k1Emcosωmt) …(2)
अतः एम्पलीफायर के आधार पर वाहक तरंग वोल्टेज लाभ ec = Eccosωct आरोपित करने पर प्रवर्धक का निर्गत वोल्टेज
V0 = Avec + AvEccosωct …(3)
अब माना समीकरण (2) से Av का मान समीकरण (3) में रखने पर,
V0 = k2[Ie + k1Emcosωmt]Eccosωct
या V0 = k2IeEccosωct + \frac{k_1k_2E_cE_m}{2} [cos(ωc + ωm)t + cos(ωc – ωm)t]
या V0 = k2Ie[Eccosωct + \frac{k_1E_cE_m}{2I_e} {cos(ωc + ωm)t + cos(ωc – ωm)t}]
या V0 = k2[Eccosωct + \frac{m_aE_c}{2} {cos(ωc + ωm)t + cos(ωc – ωm)t}] …(4)
अर्थात् यहां k = k2Ie तथा ma = \frac{k_1E_m}{I_e}
अतः समीकरण (4) से स्पष्ट है कि ट्रांजिस्टर का आयाम मॉडुलेटर वाहक तरंग के निर्गत वोल्टेज का समीकरण है।

Note – संबन्धित प्रशन –
Q.1 ट्रांजिस्टर का आयाम मॉडुलेटर के रूप में उपयोग किस प्रकार किया जाता है? आयाम माॅडुलित तरंग के निर्गत वोल्टेज का व्यंजक स्थापित कीजिए।
Q.2 ट्रांजिस्टर का आयाम मॉडुलेटर की भांति क्यों प्रयोग होता है? तथा इसके लिए निर्गत वोल्टेज का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

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