ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण समझाइए | Transistor Circuit Configurations in Hindi

ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण

ट्रांजिस्टर में तीन प्रकार के टर्मिनल होते हैं –
(1). उत्सर्जक (E)
(2). आधार (B) तथा
(3). संग्राहक (C) ।
अब यदि ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण किसी परिपथ से संबद्ध किया जाता है तो इस प्रकार के कार्य हेतु दो निवेशी तथा दो निर्गत टर्मिनलों की आवश्यकता होती है। जैसे- इस प्रक्रिया में दो टर्मिनल माइक्रोफोन के लिए उपयोग होते हैं तथा दो टर्मिनल लाउडस्पीकर के लिए उपयोग होते हैं।

अतः इस प्रकार की समस्या के लिए ट्रांजिस्टर के तीनों टर्मिनलों में से किसी भी एक टर्मिनल को निवेशी एवं निर्गत परिपथों के बीच में उभयनिष्ठ कर देते हैं।

इसमें निवेशी चिन्ह को टर्मिनल के उभयनिष्ठ तथा एक को टर्मिनल के बीच लगा देते हैं। एवं निर्गत चिन्ह को टर्मिनल के उभयनिष्ठ तथा दूसरे को टर्मिनल के बीच प्राप्त कर लेते हैं।

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ट्रांजिस्टर परिपथ के विन्यास क्या है

ट्रांजिस्टर को किसी परिपथ में तीन विधियों से जोड़ा जा सकता है, जिसके नाम है –
(1). उभयनिष्ठ-आधार विन्यास (C-B C)
(2). उभयनिष्ठ-उत्सर्जक विन्यास (C-E C)
(3). उभयनिष्ठ-संग्राहक विन्यास (C-C C)

नोट – यहां उभयनिष्ठ शब्द उस इलेक्ट्रोड के साथ जुड़ा होता है जो निवेशी एवं निर्गत परिपथों में उभयनिष्ठ होता है।

इस प्रकार, यह उभयनिष्ठ इलेक्ट्रोड प्रायः ‘भू-सम्पर्कित’ होता है। अतः इस संबंध के उपरोक्त तीनों विन्यासों को ‘भू-सम्पर्कित-आधार विन्यास’, ‘भू-सम्पर्कित-उत्सर्जक विन्यास’ तथा ‘भू-सम्पर्कित-संग्राहक विन्यास’ भी कहा जाता है। इन प्रत्येक विन्यासों के अपने-अपने अभिलक्षण होते हैं।

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अब हम ट्रांजिस्टर के तीनों विन्यासों को चित्र की सहायता से समझते हैं

1. उभयनिष्ठ-आधार विन्यास

इस प्रकार के विन्यास में ट्रांजिस्टर परिपथ के टर्मिनल-आधार (B) को निवेशी तथा निर्गत परिपथों के बीच उभयनिष्ठ करके ‘भू-सम्पर्कित’ कर दिया जाता है, जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण

2. उभयनिष्ठ-उत्सर्जक विन्यास

इस प्रकार के विन्यास में ट्रांजिस्टर के टर्मिनल-उत्सर्जक (E) को निर्गत तथा निवेशी परिपथों के बीच उभयनिष्ठ करके ‘भू-सम्पर्कित’ कर देते हैं, जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण

3. उभयनिष्ठ-संग्राहक विन्यास

इस विन्यास में ट्रांजिस्टर के टर्मिनल-संग्राहक (C) को निर्गत तथा निवेशी परिपथों के बीच उभयनिष्ठ करके ‘भू-सम्पर्कित’ कर दिया जाता है, जैसा कि चित्र-3 में दिखाया गया है।

ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण

ट्रांजिस्टर परिपथ के अभिलक्षण

किसी ट्रांजिस्टर के निवेशी और निर्गत प्रतिबाधा किसी परिपथ में जोड़े जाने की विधि के अनुसार परिवर्तित होते हैं। अर्थात् किसी ट्रांजिस्टर परिपथ में निर्गत तथा निवेशी मानों में वोल्टता के साथ होने वाले परिवर्तन को निरूपित करने वाले वक्र ट्रांजिस्टर के अभिलक्षण को प्रदर्शित करते हैं।

इन्हीं वक्रों को ही ट्रांजिस्टर परिपथ के अभिलाक्षणिक वक्र कहा जाता है। ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –
(1). निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र
(2). निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र
(3). अन्तरण अभिलाक्षणिक वक्र ।

अतः ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्र इसी ट्रांजिस्टर परिपथ में जोड़ने की विधि पर निर्भर रहते हैं। मुख्यतः ट्रांजिस्टर को जोड़ने की तीन विधियां हैं।

  • उभयनिष्ठ आधार विधि
  • उभयनिष्ठ उत्सर्जक विधि
  • उभयनिष्ठ संग्राहक विधि ।

अर्थात् ट्रांजिस्टर की कार्यविधि के उभयनिष्ठ उस इलेक्ट्रोड को व्यक्त करने का काम करता है जो निवेशी व निर्गत दोनों परिपथों में उभयनिष्ठ हो। चूंकि सर्वनिष्ठ इलेक्ट्रोड को बहुत ज्यादा भू-सम्पर्कित संग्रहण किया जा सकता है।
अतः किसी भी ट्रांजिस्टर परिपथ के स्थैतिक अभिलाक्षणिक वक्र बहुत-सी विधियों द्वारा खींचे जा सकते हैं।

संबन्धित प्रशन-
Q.1 ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है? समझाइए।
Q.2 उभयनिष्ठ आधार, उभयनिष्ठ उत्सर्जक और उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास के लिए अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए परिपथ बनाइए।
Q.3 ट्रांजिस्टर परिपथ के विन्यास क्या-क्या है? इसके अभिलक्षण भी लिखिए तथा ट्रांजिस्टर परिपथ का वर्गीकरण भी कीजिए।

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  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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