ट्रांजिस्टर लोड लाइन विश्लेषण क्या है, DC लोड रेखा खींचकर Q-बिंदु समझाइए | Transistor Load Line in Hindi

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हेलों दोस्तों, इस आर्टिकल में हमनें “ट्रांजिस्टर लोड लाइन” (Transistor Load Line in Hindi) के बारे में समझाया है, इसमें हमनें ट्रांजिस्टर लोड लाइन की परिभाषा, विश्लेषण और डीसी (D.C.) लोड लाइन में Q-बिंदु क्या होता है। और इसके उपयोगों को भी विस्तार से सरल भाषा में समझाया गया है, तो आप इस अध्याय को पूरा जरूर पढ़ें।

ट्रांजिस्टर लोड लाइन क्या है?

ट्रांजिस्टर लोड लाइन एक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस का एक महत्वपूर्ण अंश है जो ट्रांजिस्टर के आन्तरिक संरचना और संदर्भी विद्युत् मानों के बीच संबंध को प्रदर्शित करता है। ट्रांजिस्टर लोड लाइन एक प्रकार की ग्राफिकल रेखा है जो ट्रांजिस्टर के कार्यात्मक क्षेत्र में उर्जा के प्रवाह को दिखाती है। और ट्रांजिस्टर की संचालन क्षमता व सीमाओं को निर्धारित करने में सहायता करती है।

ट्रांजिस्टर लोड लाइन (Transistor Load Line in Hindi) एक ग्राफिकल रेखा होती है जो ट्रांजिस्टर के संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) संधि पर विधुतीय् गतिविधियों को दिखाती है। यह लोड लाइन ट्रांजिस्टर के कार्यात्मक क्षेत्र में ऊर्जा की आपूर्ति को प्रतिष्ठित करती है।

इस प्रकार, लोड लाइन का संकेत ट्रांजिस्टर के बीटा वृद्धि गुणांक के साथ जुड़ा होता है जिसको प्रयोगकर्ता निर्धारित करता है। ट्रांजिस्टर लोड लाइन की सहायता से प्रयोगकर्ता ट्रांजिस्टर के सभी संदर्भी मानों को निर्धारित कर सकता है और विद्युतीय् संचालन को बनाए रख सकता है।

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ट्रांजिस्टर लोड लाइन विश्लेषण (Transistor Load Line Analysis in Hindi)

ट्रांजिस्टर लोड लाइन विश्लेषण एक प्रकार की विधि होती है जिसका उपयोग इलेक्ट्रोनिक उपकरणों में प्रयुक्त ट्रांजिस्टर के प्रचालन-बिंदु या आपूर्ति-बिंदू को विश्लेषिण करने के लिए किया जाता है। यह विश्लेषण प्राथमिक रूप से ट्रांजिस्टर के Q-बिंदु (प्रचालन-बिंदु) और आव्रत विशेष गुणों, जैसे कि बाह्य आव्रत और दायरा आव्रत विशेष को मापता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों की गणना और विभिन्न विशेषणों के लिए उपयोगी जानकारी प्राप्त होती है।

ट्रांजिस्टर लोड लाइन विश्लेषण के द्वारा ट्रांजिस्टर के कार्य के लिए उपयुक्त आव्रत मापी जाती है। यह आव्रत विशेष गुणों को मापकर एक प्रचालन-बिंदु (Q-बिंदु) को निर्धारित करती है जिस पर ट्रांजिस्टर कार्य करता है। यह आव्रत प्रचालन-बिंदु को व्यापकता के साथ दिखाती है, जहां ट्रांजिस्टर की प्रचालन-बिंदु के लिए एक लोड लाइन बनाई जाती है। जिसको चित्र-2 में नीचे दर्शाया गया है।

डीसी लोड लाइन क्या है? (DC Load Line in Hindi)

लोड लाइन या लोड रेखा ट्रांजिस्टर के संग्राहक अभिलाक्षणिक वक्रों पर खींची गई वह रेखा है, जो ट्रांजिस्टर के प्रत्येक संभव ‘प्रचालन-बिंदु’ को दर्शाती है।

जैसा कि चित्र-1 में n-p-n ट्रांजिस्टर का उभयनिष्ठ-उत्सर्जक (CE) परिपथ दर्शाया गया है जिसमें कोई भी बाह्य सिग्नल नहीं लगाया गया है। चित्र-1 में देखें।

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ट्रांजिस्टर लोड लाइन (डीसी लोड लाइन)
ट्रांजिस्टर लोड लाइन

चित्र-1 के अनुसार, परिपथ में D.C. सप्लाई बैटरी VCC, लोड प्रतिरोध RL और ट्रांजिस्टर में से होकर संग्राहक-धारा IC देती है। अतः RL के आर-पार वोल्टता पतन ICRL होता है, तब किसी क्षण संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टता VCE होगी। अब

जैसा कि चित्र-2 में ट्रांजिस्टर की निर्गत IC – VCE अभिलाक्षणिक वक्रें दर्शाई गई हैं। चित्र-2 में देखें।

ट्रांजिस्टर लोड लाइन (डीसी लोड लाइन)
डीसी लोड लाइन

अब चित्र-1 के अनुसार, VCE = VCC – ICRL …(1)
यहां VCE संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज, VCC सप्लाई वोल्टेज, RL लोड प्रतिरोध तथा IC संग्राहक धारा है।

चूंकि VCC व RL नियत है अतः समीकरण (1) निर्गत IC – VCE वक्रों पर खींची गई एक ऋजु रेखा को व्यक्त करता है। इस रेखा को “डीसी लोड रेखा” (DC load line in Hindi) कहते हैं।
DC लोड रेखा खींचने के लिए इस रेखा के दो अंतः बिंदुओं का निर्धारण निम्न प्रकार करते हैं –

(1). जब संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज VCE = 0 – तब संग्राहक-धारा IC अधिकतम (= \frac{V_{CC}}{R_L} ) होती है, अर्थात् संग्राहक-उत्सर्जक टर्मिनल लघुपथित होगा। तब समीकरण (1) से,
VCE = VCC – ICRL
अथवा 0 = VCC – ICRL
अथवा IC = \frac{V_{CC}}{R_L} …(2)
यही संग्राहक धारा (1) का अधिकतम मान है तथा संग्राहक-धारा IC-अक्ष पर बिंदु ‘A’ चित्र-2 के संगत है। यहां OA = \frac{V_{CC}}{R_L}

(2). जब संग्राहक-धारा IC = 0 – तब संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज VCE अधिकतम है और VCC के बराबर है, अर्थात् संग्राहक उत्सर्जक टर्मिनल खुला होगा। तब समीकरण (1) से,
VCE = VCC – ICRL
या VCE = VCC …(3)
यही संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज (2) का अधिकतम मान है। तथा संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज VCE-अक्ष पर बिंदु ‘B’ चित्र-2 के संगत है। यहां OB = VCC

अर्थात् बिंदुओं A व B को मिलाने पर डीसी लोड रेखा AB प्राप्त हो जाती है।

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प्रचालन बिंदु (Operating Point in Hindi)

ट्रांजिस्टर में संग्राहक-धारा IC व संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज VCE के शून्य सिग्नल मान ‘प्रचालन-बिंदु’ या ‘Q-बिंदु’ कहलाते हैं। अर्थात् सिग्नल लगाने पर IC व VCE के मान परिवर्तित हो जाते हैं।

ट्रांजिस्टर लोड लाइन की उपयोगिता

ट्रांजिस्टर परिपथ के विश्लेषण के लिए एक ज्ञात आधार-धारा IB के लिए विभिन्न संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज VCE के मानों के लिए संग्राहक-धारा IC के मानों की आवश्यकता होती है। यह सूचना ट्रांजिस्टर लोड लाइन की सहायता से सुगमता पूर्वक प्राप्त की जा सकती है।
यदि जब VCE = 0, तब IC = \frac{V_{CC}}{R_L} (संग्राहक धारा IC का अधिकतम मान) तथा
यदि जब VCE = VCC (अधिकतम मान), तब IC = 0 (शून्य) होता है। संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टेज VCE के किसी अन्य मान के लिए (माना OD मान), संग्राहक-धारा IC = OC, चित्र-2 के संगत देखें।

Note – सम्बन्धित प्रशन परीक्षाओं में पूछें जाते हैं –
Q.1 ट्रांजिस्टर लोड लाइन क्या है? परिभाषा, विश्लेषण व डीसी लोड लाइन किस प्रकार खींची जाती है। तथा इसके उपयोग भी समझाइए।
Q.2 लोड लाइन क्या है? इसे किस प्रकार खींचा जाता है इसके उपयोग क्या है? समझाइए।
Q.3 डीसी लोड लाइन किस प्रकार निरूपित की जाती है? इसमें प्रचालन बिंदु या Q-बिंदु क्या होता है।
Q.4 ट्रांजिस्टर लोड लाइन से आप क्या समझते हैं? इसका विश्लेषण करों। तथा DC लोड रेखा में Q-बिंदु किस प्रकार ज्ञात किया जाता है? सिद्ध करों।

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