गैसों में अभिगमन घटनाएं क्या है, ऊष्मा चालकता गुणांक का सूत्र | Transport Phenomena in Gases in Hindi

गैसों में अभिगमन घटनाएं क्या है

अणुगति सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी गैस के अणु निरंतर गतिशील अवस्था में होते हैं। यदि गैस के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न प्रवाह वेग, भिन्न-भिन्न ताप या अणुओं का भिन्न-भिन्न सांद्रण होता है, तो गैस के एक भाग से दूसरे भाग में क्रमशः संवेग, ऊष्मा ऊर्जा या द्रव्यमान का प्रवाह होता है। तो इस प्रकार श्यानता, ऊष्मा-चालन तथा विसरण क्रमशः संवेग प्रवाह, ऊष्मा प्रवाह या द्रव्यमान प्रवाह का अभिगमन व्यक्त करते हैं। इसलिए इन घटनाओं को “अभिगमन घटनाएं” (Transport Phenomena in Hindi) कहा जाता है।
अर्थात् यदि गैस में साम्यावस्था स्थापित होती है, तो जिसके लिए इन्हें निम्न तीन में से कोई भी प्रकरण संभव हो सकता है।

1.संवेग-प्रवाह – गैस के विभिन्न भागों के वेग भिन्न-भिन्न होने पर तथा विभिन्न सतहों के बीच आपेक्षिक गति होती है। इस अवस्था में तेज चलने वाली सतह, मन्द चलने वाली सतह को संवेग स्थानांतरित करती है। जिससे निकाय में साम्यावस्था आ सके। तो इस संवेग प्रवाह के कारण ‘श्यानता’ की घटना होती है।

2.ऊर्जा-प्रवाह – किसी गैस के विभिन्न भागों के ताप भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। तो इस स्थिति में गैस के अणु उच्च ताप के क्षेत्र से निम्न ताप के क्षेत्र की और गतिज ऊर्जा का स्थानांतरण करते हैं, जिससे निकाय साम्यावस्था प्राप्त कर सके। तो इस ऊर्जा प्रवाह के कारण ‘ऊष्मा-चालन’ की घटना होती है।

3.द्रव्यमान-प्रवाह – यदि किसी गैस के विभिन्न भागों में अणुओं के भिन्न-भिन्न सांद्रण होने के कारण गैस के अणुओं का उच्च घनत्व क्षेत्र से निम्न क्षेत्र की ओर द्रव्यमान के रूप में अभिगमन होता है, जिससे निकाय साम्यावस्था में आ सके। तो इस द्रव्यमान प्रवाह के कारण ‘विसरण’ की घटना होती है।

और पढ़ें.. गैस की श्यानता क्या है, श्यानता-गुणांक का सूत्र

गैस की ऊष्मा-चालकता क्या है

किसी गैस की ऊष्मा चालकता की व्याख्या अणुगति सिद्धांत से की जा सकती है। तथा इसमें गैस अणु ऊष्मीय ऊर्जा के बाहक का कार्य करते हैं। जिसके कारण इसे गैस की “ऊष्मा-चालकता” (Thermal Conductivity of a Gas in Hindi) कहा जाता है।
माना किसी गैस में तीन क्षैतिज तल RS, MN व TU इस प्रकार लिए गए हैं। कि तल RS से TU की ओर बढ़ने पर ताप बढ़ता जाता है। अर्थात् यदि तल MN के ऊपर गैस का औसत ताप, MN से नीचे की अपेक्षा अधिक है। अतः TU से MN के नीचे जाने वाले अणुओं की गतिज ऊर्जा तथा RS से MN के ऊपर जाने वाले अणुओं की अपेक्षा अधिक होगी।

ऊष्मा-चालकता
ऊष्मा-चालकता

अतः MN से नीचे वाले अणुओं की औसत ऊर्जा लगातार बढ़ रही है। जबकि MN से ऊपर जाने वाले अणुओं की औसत ऊर्जा घट रही है। अर्थात् MN से नीचे वाली गैस का ताप बढ़ रहा है तथा MN से ऊपर वाली गैस का ताप घट रहा है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। अतः इसी कारण ऊपर से नीचे ऊष्मा का संचरण हो रहा है, तो इस प्रकार “ऊष्मीय चालन, गतिज ऊर्जा अभिगमन की घटना है।”

गैस की ऊष्मा-चालकता गुणांक का सूत्र

माना किसी गैस के प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या ‘n’ तथा उनका औसत वेग \overline{v} है, तो चूंकि ऊष्मीय गति के कारण गैस के अणु सभी सम्भव दिशाओं में गति करते हैं।

ऊष्मा-चालकता गुणांक
ऊष्मा-चालकता गुणांक

अतः x, y व z अक्षों में से प्रत्येक अक्ष के समांतर गति करने वाले अणुओं की औसत संख्या, कुल अणुओं की संख्या की एक-तिहाई होगी। तब इनमें से आधे अणु (अर्थात् कुल का 1/6) धनात्मक दिशा में गति करेंगे। अतः तल MN के एकांत क्षेत्रफल से एक सेकंड में तल के नीचे या ऊपर से जाने वाले अणुओं की संख्या = n \overline{v} × \frac{1}{6}
या = \frac{n \overline{v}}{6}

अर्थात् माना यदि तल MN में प्रत्येक अणु की ऊर्जा ‘E’ तथा तल MN के अभिलम्बवत् ऊर्जा प्रवणता \frac{dE}{dZ} है। यदि तल RS तथा TU प्रत्येक तल MN से λ दूरी पर हो, (यहां λ माध्य-मुक्त-पथ है) तो TU तल पर प्रत्येक अणु की ऊर्जा
= E + λ.( \frac{dE}{dZ} )
तथा तल RS पर प्रत्येक अणु की ऊर्जा
= E – λ.( \frac{dE}{dZ} )

अतः तल TU से नीचे की ओर जाने वाले अणुओं की ऊर्जा, जो कि तल MN के एकांक क्षेत्रफल को एक सेकण्ड में पार करते हैं।
= \frac{1}{6} n \overline{v} (E + λ \frac{dE}{dZ} )

इसी प्रकार तल RS से ऊपर की ओर जाने वाले अणुओं की ऊर्जा, जोकि तल MN के एकांक क्षेत्रफल को एक सेकण्ड में पार करते हैं।
= \frac{1}{6} n \overline{v} (E – λ \frac{dE}{dZ} )

अतः तल MN के एकांक क्षेत्रफल से एक सेकंड में नीचे की ओर जाने वाली कुल ऊर्जा
= \frac{1}{6} n \overline{v} (E + λ \frac{dE}{dZ} ) – \frac{1}{6} n \overline{v} (E – λ \frac{dE}{dZ} )
= \frac{1}{3} n \overline{v} λ.( \frac{dE}{dZ} )

परंतु प्रत्येक अणु की ऊष्मीय ऊर्जा E = mCvT
यहां Cv = स्थिर आयतन पर गैस की विशिष्ट ऊष्मा तथा T = गैस का ताप है।
अतः तल MN के एकांक क्षेत्रफल से एक सेकण्ड में नीचे की ओर जाने वाली ऊर्जा
= \frac{1}{3} n \overline{v} λ \frac{d}{dZ} mCvT
या = \frac{1}{3} n \overline{v} λmCv.( \frac{dT}{dZ} )

अब परिभाषा से “किसी गैस की ऊष्मा चालकता गुणांक (K), ऊष्मा की वह मात्रा होती है। जो गैस के एकांक क्षेत्रफल में होकर एक सेकंड में प्रति एकांक ताप प्रवणता के लिए बहती है।” अर्थात्
K = \frac{ \frac{1}{3} mn \overline{v} λC_v \frac{dT}{dZ}}{ \frac{dT}{dZ}}
या K = \frac{1}{3} mn \overline{v} λCv
परन्तु माध्य-मुक्त-पथ λ = \frac{1}{ \sqrt{2} πnσ^2} तो इसलिए,

\footnotesize \boxed{ K = \frac{1}{3 \sqrt{2}} \frac{m \overline{v}C_v}{πσ^2} }

अतः “यही गैस की ऊष्मा चालकता का अभीष्ट व्यंजक है।”
अर्थात् इस समीकरण में ‘n’ नहीं है, अतः ऊष्मा चालकता (K) का मान गैस के दाब पर निर्भर नहीं करता है।

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Note – किसी गैस की श्यानता गुणांक η और ऊष्मा-चालकता गुणांक K के बीच क्या संबंध है।

श्यानता गुणांक η व चालकता गुणांक K में संबंध

हम जानते हैं कि
η = \frac{1}{3} mn \overline{v} λ ….(1)
तथा
K = \frac{1}{3} mn \overline{v} Cvλ ….(2)

समीकरण (2) की (1) से,
\frac{K}{η} = \frac{ \frac{1}{3} mn \overline{v} C_vλ}{ \frac{1}{3} mn \overline{v} λ}
या \frac{K}{η} = Cv

या \footnotesize \boxed{ K = ηC_v }

“यही गैस की श्यानता गुणांक η और गैस की ऊष्मा-चालकता गुणांक K के बीच संबंध कहलाता है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 गैसों की अभिगमन घटनाएं क्या होती हैं?
Q.2 किसी गैस में अभिगमन की घटनाओं से क्या तात्पर्य है ? अणुगति सिद्धांत के आधार पर किसी गैस के ऊष्मीय चालकता गुणांक का व्यंजक प्राप्त कीजिए ?
Q.3 गैस की श्यानता गुणांक η और ऊष्मा-चालकता गुणांक K, K = ηCv को स्थापित कीजिए ?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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