समतल प्रगामी तरंगें क्या है, परिभाषा, सूत्र व अनुप्रस्थ तरंग क्या है | Transverse Waves in Hindi

समतल प्रगामी तरंगें

यदि जब किसी माध्यम में तरंग के संचरित होने पर माध्यम के कण अपनी माध्य स्थिति के दोनों और सरल आवर्त गति में कम्पन्न करते हैं। तो इस प्रकार की तरंग को “समतल प्रगामी तरंगें (Plane Progressive Wave in Hindi)” कहते हैं।

समतल प्रगामी तरंग का समीकरण

माना जब किसी माध्यम में एक समतल सरल आवर्त प्रगामी तरंग धनात्मक x-अक्ष की दिशा में संचरित होती है। जिसकी चाल v है। माना हम उस समय का मापन उस क्षण से प्रारम्भ करते हैं। जबकि मूल बिंदु O पर स्थिति कण 1 अपना कंपन प्रारंभ करता है। यदि t सेकंड बाद इस कण का विस्थापन y हो, तो
y = a sinωt …(1)
जहां a कम्पन का आयाम एवं ω = 2πn, जहां n तरंग की आवृत्ति है।

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समतल प्रगामी तरंग
समतल प्रगामी तरंग

जैसे-जैसे तरंग कण 1 से आगे बढ़ती जाती है। वैसे-वैसे माध्यम के अन्य कण भी कम्पन करना प्रारंभ कर देते हैं। यदि तरंग की चाल v है, तो कण 1 से x दूरी पर स्थित कण 6 तक तरंग \frac{x}{v} सेकंड में पहुंचेगी।
माना कि मूल बिंदु से x दूरी पर स्थित कण 6, मूल बिंदु पर स्थित कण 1 से \frac{x}{v} सेकंड बाद कंपन प्रारंभ करेगा।
अतः स्पष्ट है कि किसी समय t पर कण 6 का विस्थापन वही होगा जो कि समय t से \frac{x}{v} सेकंड पहले अर्थात् समय (t – \frac{x}{v} ) पर कण 1 का था। अतः समीकरण (1) में t के स्थान पर (t – \frac{x}{v} ) रखने पर। अतः इस प्रकार मूल बिंदु 1 से x दूरी पर स्थित कण 6 का समय t पर विस्थापन होगा।
y = a sinω(t – \frac{x}{v} ) …(2)
अतः इसी प्रकार x-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में v वेग से जाने वाली तरंग गति का समीकरण –
y = a sinω(t + \frac{x}{v} ) …(3)
{चूंकि ω = 2πn} अतः
y = a sin2πn(t – \frac{x}{v} )
{लेकिन n = \frac{v}{λ} तो,
y = a sin \frac{2πv}{λ} (t – \frac{x}{v} )
y = a sin \frac{2π}{λ} (vt – \frac{xv}{v} )
या y = a sin \frac{2π}{λ} (vt – x) …(4)
{परन्तु v = nλ = \frac{λ}{t} , जहां T आवर्तकाल है} अतः
y = a sin \frac{2π}{λ} ( \frac{λt}{T} – x)
अथवा
y = a sin2π( \frac{t}{T} \frac{x}{λ} ) …(5)
या y = a sin( \frac{2π}{T} t – \frac{2π}{λ} x)
{चूंकि \frac{2π}{T} = ω तथा \frac{2π}{λ} = k रखने पर} अतः

\footnotesize \boxed{y = a sin(ωt - kx)} …(6)

अर्थात् यहां ω को कोणीय आवृत्ति तथा k को गमन नियतांक कहते हैं। समीकरण (4), (5) तथा (6) धनात्मक x-अक्ष की दिशा में चलने वाली सरल आवर्त तरंग गति का समीकरण है।
यदि तरंग x-अक्ष की दिशा में संचरित हो रही है। तो प्रगामी तरंग के लिए,
y = a sin \frac{2π}{λ} (vt + x) …(7)
y = a sin2π( \frac{t}{T} + \frac{x}{λ} ) …(8)
y = a sin(ωt + kx) ….(9)

अतः समीकरण (6) से स्पष्ट है कि समतल प्रगामी तरंग के लिए अभीष्ट समीकरण कहलाता है। तथा समीकरण (7), (8) तथा (9) समीकरणों से स्पष्ट है कि x-अक्ष की धनात्मक दिशा में चलने वाली सरल आवर्त तरंग गति का समीकरण कहलाता है।

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समतल प्रगामी तरंग में कलान्तर तथा पथान्तर में संबंध

माना कि किसी माध्यम में सरल आवर्त प्रगामी तरंग + x-अक्ष की दिशा में चल रही है। तथा मूल बिंदु से x दूरी पर स्थित माध्यम के कण का किसी समय t पर विस्थापन निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त होता है।
y = a sin(ωt – kx)
अतः इस कण की स्थिति x, समय t पर कलान्तर φ है तब कलान्तर ,
φ = (ωt – kx) …(1)
माना कि समय t पर दो कणों की कलायें मूल बिंदु से दूरीयां x1 व x2 है, तो कलान्तर φ1 व φ2 है, तब समीकरण (1) से,
φ1 = ωt – kx1 तथा φ2 = ωt – kx2
अतः φ1 – φ2 = k(x2 – x1)
अथवा
\footnotesize \boxed{∆φ = \frac{2π}{λ} × ∆x}
यह उन दो कणों का कलांतर है जिनके बीच दूरी ∆x है। यदि ∆x = λ हो, तो
∆φ = 2π
अतः माध्यम में ऐसे दो कणों में जिनके बीच λ दूरी हो कलान्तर 2π है अर्थात् वह कम्पन की समान कला में होते हैं।
अब माना कि किसी कण की स्थिति x समय t1 पर कला φ1 तथा समय t2 पर कला φ2 है। तब समीकरण (1) से,
φ1 = ωt1 – kx तथा φ2 = ωt2 – kx
अतः φ1 – φ2 = ω(t1 – t2)
अथवा
\footnotesize \boxed{∆φ = \frac{2π}{T} × ∆t}
यह किसी कण के लिए समयांतराल ∆t में होने वाला कलांतर है। यदि ∆t = T हो, तब
∆φ = 2π
अतः एक आवर्तकाल के पश्चात् कण के कम्पन की कला वही हो जाती है जो प्रारंभ में थी।

प्रगामी तरंग में कण का वेग तथा त्वरण

कण का वेग – किसी माध्यम में x-अक्ष की धन दिशा में चलने वाली सरल आवर्त प्रगामी तरंग का समीकरण है
y = a sin(ωt – kx) …(1)
यहां a माध्यम के किसी कण का विस्थापन-आयाम है।
कण का वेग u समीकरण (1) को समय t के सापेक्ष अवकलन करने से प्राप्त होगा अर्थात्
u = \frac{dy}{dt} = ωa cos(ωt – kx) …(2)
यदि cos पद का अधिकतम मान 1 है। अतः कण का अधिकतम वेग अर्थात् वेग-आयाम
\footnotesize \boxed{ u_{max} = ωa }
कण का त्वरण – कण का त्वरण f समीकरण (2) को समय t के सापेक्ष अवकलन करने पर प्राप्त होगा अर्थात्
f = \frac{du}{dt} = – ω2a sin(ωt – kx)

यदि sin पद का अधिकतम मान 1 है। अतः कण का अधिकतम त्वरण, अर्थात् त्वरण-आयाम
\footnotesize \boxed{ f_{max} = - ω^2a }

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Note – अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगें क्या है?

अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves in Hindi)

जब किसी माध्यम में यान्त्रिक तरंग के संचरित होने पर माध्यम के कण तरंग में चलने की दिशा के लंबवत् कम्पन्न करते हैं। तो इस प्रकार के तरंग को “अनुप्रस्थ तरंग” कहते हैं।

अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves in Hindi)

यदि जब किसी स्थान पर यान्त्रिक तरंगों के संचरित होने पर स्थान के कण तरंग में चलने की दिशा के अनुदिश कम्पन्न करने लगते हैं। तो ऐसी तरंगों को “अनुदैर्ध्य तरंग” कहते हैं।

Note – समतल प्रगामी तरंग से सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 समतल प्रगामी तरंग से आप क्या समझते हैं? समतल प्रगामी तरंग के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए?
Q.2 समतल प्रगामी तरंग किसे कहते हैं? सिद्ध कीजिए तथा समतल प्रगामी तरंग में दो बिन्दुओं के बीच कलान्तर तथा पथान्तर में संबंध स्थापित कीजिए।
Q.3 समतल प्रगामी तरंग की परिभाषा दीजिए? तथा चित्र की सहायता से इसके सूत्र का निगमन कीजिए?
Q.4 प्रगामी तरंग में कण का वेग-आयाम तथा त्वरण-आयाम ज्ञात कीजिए?
Q.5 अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंग क्या है? प्रगामी तरंग से आप क्या समझते हैं? समतल प्रगामी तरंग के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए?

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