द्वि-पिण्ड समस्या का एक पिण्ड समस्या में लघुकरण | TwoBody and OneBody Problem in Hindi

दो-पिण्ड का एक पिण्ड समस्या में समानयन

यदि दो पिण्डों के बीच केंद्रीय बल कार्य कर रहा हैं। तो इस द्वि-पिण्ड समस्या को एक-पिण्ड समस्या के रूप में रख सकते हैं।
मान कि m1 व m2 द्रव्यमान के दो कण एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित है। और इनकी स्थिति वेक्टर क्रमशः r1 व r2 है। जैसा की चित्र में दिखाया गया है।
अतः m1 व m2 से वेक्टर दूरी \overrightarrow{r} = \overrightarrow{r_1} \overrightarrow{r_2} होगी।

द्वि - पिण्ड समस्या
द्वि – पिण्ड समस्या

यदि m1 और m2 द्रव्यमानों के कणों पर \overrightarrow{F_{12}} और \overrightarrow{F_{21}} केन्द्रीय बल कार्य कर रहे हैं। तो,

\overrightarrow{F_{12}} = m1 \frac{d^2 \overrightarrow{r_1}}{dt^2} ….(1)

\overrightarrow{F_{21}} = m2 \frac{d^2 \overrightarrow{r_2}}{dt^2} ….(2)

न्यूटन के तीसरे नियम से आन्तरिक बल परस्पर बराबर तथा एक दूसरे के विपरीत होते हैं। अर्थात्

\overrightarrow{F_{12}} = \overrightarrow{F_{21}} = \overrightarrow{F}

\frac{d^2 \overrightarrow{r_1}}{dt^2} = \frac{ \overrightarrow{F}}{m_1}

और \frac{d^2 \overrightarrow{r_2}}{dt^2} = – \frac{ \overrightarrow{F}}{m_2}

\frac{d^2}{dt^2} ( \overrightarrow{r_1} \overrightarrow{r_2} ) = \overrightarrow{F} ( \frac{1}{m_1} + \frac{1}{m_2} ) F \widehat{r}

यदि इस समीकरण में \frac{1}{m_1} + \frac{1}{m_2} = \frac{1}{µ} रखें, तो

\frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \frac{F}{µ} \widehat{r} = \frac{ \overrightarrow{F}}{µ}

\overrightarrow{F} = µ \frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} ….(3)

अतः समीकरण (3) एक पिण्ड समस्या को प्रदर्शित करता है। क्योंकि यह समीकरण एक स्थिर केन्द्र से वेक्टर \overrightarrow{r} दूरी पर द्रव्यमान µ के एक कण के गति के समीकरण जैसा है। इस कारण
µ = (m1m2)/(m1 + m2) को m1 व m2 द्रव्यमान कणों का समानीत द्रव्यमान कहते हैं। µ का मान m1 या m2 से कम होता है।

और पढ़ें…न्यूटन के गति के नियम

हाइड्रोजन परमाणु का समानीत द्रव्यमान

हाइड्रोजन परमाणु में m द्रव्यमान का एक इलेक्ट्रॉन M द्रव्यमान से अधिक भारी प्रोटॉन के चारों ओर घूमता है। इन दोनों का समानीत द्रव्यमान इस प्रकार ज्ञात करते हैं।
µ = \frac{mM}{(m + M)}

µ = m (1 + \frac{m}{M} )-1

µ = m (1 – \frac{m}{M} ) (बाइनोमियल प्रमेय द्वारा)

लेकिन \frac{m}{M} = \frac{इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान}{प्रोटॉन का द्रव्यमान} = \frac{1}{1836}

\footnotesize \boxed{ µ = m (1 - \frac{1}{1836}) ≈ m लगभग }

अर्थात “हाइड्रोजन परमाणु का समानीत द्रव्यमान, इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है।”

पॉजिट्रोनियम का सामानीत द्रव्यमान

“इलेक्ट्रॉन तथा पोजिट्रोन (इसका द्रव्यमान तथा आवेश इलेक्ट्रॉन e– के बराबर होता है) दोनों मिलकर एक हाइड्रोजन परमाणु जैसा अस्थाई संयोजन बनाते हैं। जिसे पॉजिट्रोनियम कहते हैं।” इसका समानीत द्रव्यमान

µ’ = \frac{mm}{(m + m)}
\footnotesize \boxed{ µ' = \frac{m}{2} }

अतः “पॉजिट्रोनियम का समानीत द्रव्यमान, इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का आधा (1/2) होता हैं।”

Note – संबंधित प्रश्न –
Q.1 द्वि – पिण्ड समस्या का एक पिण्ड समस्या में लघुकरण किस प्रकार कर सकते है? हाइड्रोजन तथा पोजीट्रोनियम का समानीत द्रव्यमान क्या होता है, ज्ञात करों?
Q.2 दो समुदाय जो केंद्रीय बल के प्रभाव में गति कर रहे हैं, तथा इनकी समस्या को एक समुदाय की समस्या में किस प्रकार बदलेंगे व्याख्या कीजिए तथा समानीत द्रव्यमान क्या होता है?
Q.3 हाइड्रोजन परमाणु व पाॅजिट्रोनियम परमाणु का समानीत द्रव्यमान कैसे ज्ञात कीजिए?
Q 4 दो पिंडों की समस्या का एक पिंड समस्या में समानयन किस प्रकार करते हैं? हाइड्रोजन परमाणु तथा पॉजिट्रोनियम के उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए। तथा समानीत द्रव्यमान की अवधारणा समझाइए?

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