वास्तविक गैस समीकरण क्या है, वाण्डर वाल्स समीकरण लिखिए | Van der Waal’s Equation in Hindi

वास्तविक गैस का समीकरण

यदि जब आदर्श गैस की अवस्था समीकरण वास्तविक गैसों के नियमों का पालन नहीं करती है। क्योंकि कोई भी गैस आदर्श नहीं होती है। वास्तव में वास्तविक गैसों के अणुओं का एक परिमित आकार होता है, तथा वे एक-दूसरे को आकर्षित भी करते रहते हैं। इस कारण ‘वास्तविक गैस की अवस्था समीकरण, आदर्श गैस की समीकरण’ से भिन्न होती है।
आदर्श गैस समीकरण का व्यंजक निम्न संकल्पनाओं पर निर्भर करता है-
1.प्रत्येक गैस के अणु अत्यंत छोटे आकार के होते हैं जिससे उनके द्वारा घेरा गया आयतन आदर्श गैस के कुल आयतन के सापेक्ष उपेक्षणीय होता है।
2.गैस के अणु एक-दूसरे पर आकर्षण बल नहीं लगाते हैं।
जबकि वास्तव में उच्च दाब पर अणुओं के आकार को नगण्य नहीं माना जा सकता है। तथा अंतरा आणविक आकर्षण बल के कारण बल प्रभावी हो जाता है। इसलिए वास्तविक गैस, आदर्श गैस समीकरण से विचलन को दर्शाती हैं।

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वाण्डर वाल्स का समीकरण

इस नियम के अनुसार, ” वाण्डर वाल्स ने अणुओं के परिसीमित आकार तथा उनके आपसी आकर्षण बल के लिए, आदर्श गैस समीकरण में अनुगामी संशोधन करके वास्तविक गैसों के लिए ‘वाण्डर वाल्स की अवस्था समीकरण’ को प्राप्त किया।”
माना यदि एक मोल आदर्श गैस का दाब P तथा आयतन V है। तब आदर्श गैस के समीकरण से,
PV = RT …..(1)

यहां R एक सार्वत्रिक गैस नियतांक है तथा T गैस का परम ताप है।
अब माना यदि 1 मोल वास्तविक गैस का प्रेक्षित दाब p पर प्रेक्षित आयतन v है, तब आदर्श गैस समीकरण के अनुसार, समीकरणों में निम्न संशोधन करने पर,

1.अणुओं के परिमित आकार के लिए संशोधन

चूंकि यदि अणु अपने परिमित आकार के कारण कुछ स्थान घेरते हैं। अतः गैस का वह आयतन जिसमें अणु ऊष्मीय गति करते रहते हैं। तथा प्रेक्षित आयतन v से कुछ कम होता है माना यह आयतन (v – b) है, तब यहां b एक स्थिर राशि है जो कि 1 ग्राम अणु गैस के अणुओं के प्रभावी आकार तथा उनकी संख्या पर निर्भर करती है।
इस प्रकार वास्तविक गैस, जिसका आयतन v है, अतः इससे कम आयतन V वाली आदर्श गैस के तुल्य हैं। अतः प्रभावी आयतन –
V = v – b …..(2)

2.परस्पर आण्विक आकर्षण के लिए संशोधन

यदि गैस के अंदर वह अणु (जैसे- n) जो पूर्णतः चारों ओर से अन्य अणुओं से घिरे होते हैं। वह अणु सभी दिशाओं के दूसरे अणुओं द्वारा समान रूप से आकर्षित होते हैं। जैसे की चित्र में दिखाया गया है।

और पढ़ें.. वाण्डरवाल्स अवस्था समीकरण, क्रांतिक नियतांक क्या है

वाण्डर वाल्स संशोधन
वाण्डर वाल्स संशोधन

इसलिए उन पर कार्य करने वाला परिणामी ससंजक बल शून्य होता है। लेकिन जब कोई अणु बर्तन की दीवारों से टकराता है, तो दूसरे अणुओं द्वारा पीछे की ओर खींचे जाने के कारण बर्तन की दीवारों पर गैस का प्रेक्षित दाब, बर्तन में गैस के वास्तविक दाब से कम होता है। यदि दाब p में यह कमी (माना) p1 है, जो
1.प्रति एकांक आयतन में आकर्षित करने वाले अणुओं की संख्या, तथा

2.बर्तन की दीवारों के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर प्रति सेकेंड टकराने वाले अणुओं की संख्या के समानुपाती होती है।
यह दोनों कारक एकांक आयतन में अणुओं की संख्या अर्थात् गैस के घनत्व ρ पर निर्भर करते हैं। इसलिए,
दाब में कमी pn ∝ ρ2 \frac{1}{v^2}
या pn = \frac{a}{v^2}

यहां a एक नियतांक है, तथा v गैस का आयतन है।
अतः वास्तविक दाब = p + p1
= p + \frac{a}{v^2} …..(3)

यहां p प्रेक्षित दाब है। अतः अवस्था समीकरण में हमें p के स्थान पर (p + \frac{a}{v^2} ) लिखना चाहिए।
अर्थात् समीकरण (2) व (3) के मान समीकरण (1) में रखने पर,

\footnotesize \boxed{ (p + \frac{a}{v^2})(v - b) = RT } ……(4)

अर्थात् यह वास्तविक गैसों के लिए (1 ग्राम अणु के लिए) “वाण्डर वाल्स की अवस्था समीकरण” है।
यदि गैस के µ ग्राम अणु हो, तब गैस की अवस्था समीकरण होगी।
(p + \frac{aµ^2}{v^2} )(v – µb) = µRT

यहां a तथा b वाण्डर वाल्स नियतांक है तथा भिन्न-भिन्न गैसों के लिए इनके मान भिन्न-भिन्न होते हैं।

Note – सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं –
Q. 1 एक गैस के µ मूल के लिए वाण्डर वाल्स अवस्था समीकरण को व्युत्पन्न कीजिए ?
Q. 2 वास्तविक गैस की समीकरण आदर्श गैस की समीकरण से भिन्न क्यों होती है सिद्ध कीजिए ?

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