बलों के आघूर्णों की वेरिगनन प्रमेय क्या है | Varignon’s Theorem in Hindi

वेरिगनन प्रमेय क्या है

इस प्रमेय का प्रतिपादन फ्रांस के प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं गणितज्ञ पियरे वेरिगनन ने सदिश बीजगणितीय के उद्देश्य में काफी पूर्व में किया था। अर्थात् इस प्रमेय के अनुसार, “बलों के समतल में स्थित किसी बिंदु के सापेक्ष दो या दो से अधिक बलों के आघूर्णों का बीजीय योग, उस बिंदु के सापेक्ष परिणामी आघूर्ण के बराबर होता है।”

यदि किसी समतल में स्थित मात्र दो बलों पर ही विश्लेषण को सीमित कर लिया जाए तो ऐसी दशा में बलों की दो स्थितियां हो सकती हैं।

  • जब दोनों बलों की क्रिया रेखाएं एक-बिंदुगामी हों । तथा
  • जब दोनों बल परस्पर समांतर हों ।

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उपपत्ति

माना MN कोई एक भारहीन दृढ़ छड़ है जिसके दोनों सिरों F1 व F2 पर परिमाण के समांतर बल कार्यरत हैं। माना इन बलों का परिणामी F बिन्दु P से होकर जाता है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

पढ़ें.. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम, मात्रक तथा अनुप्रयोग (Law of Conservation of Angular Momentum in Hindi)

वेरिगनन प्रमेय

तब इन बलों के परिणामी का परिमाण
F = F1 + F2 …(1)
बिन्दु P के सापेक्ष बलों का आघूर्ण लेने पर,
F1 × MP – F2 × NP = F × O
या F1 × MP = F2 × NP …(2)
पुनः बलों F1 व F2 बिन्दु O के सापेक्ष आघूर्णों का बीजीय योग,
ΣM1 = F1 × MO – F2 × NO
ΣM1 = F1 × (MP – OP) – F2 × (NP + OP)
या ΣM1 = F1 × MP – F1 × OP – F2 × NP – F2 × OP
परन्तु समीकरण (2) से,
F1 × MP = F2 × NP
अतः बलों F1 व F2 का बिन्दु O के सापेक्ष आघूर्णों का बीजीय योग,
ΣM1 = – (F1 + F2) × OP
अब समीकरण (1) से, F1 + F2 = F, अतः
ΣM1 = – F × OP
जोकि बिन्दु O के सापेक्ष बलों F1 व F2 के परिणामी F का आघूर्ण है।
इस प्रकार, यह प्रमेय दो से अधिक बलों तथा बिन्दु O की अलग-अलग स्थितियों के लिए भी सत्य है।

सम्बन्धित प्रशन –
Q. 1 आघूर्णों के वेरिगनन प्रमेय का कथन लिखिए तथा दो समदिश समान्तर बलों के लिए इस प्रमेय का सत्यापन कीजिए ?
Q. 2 वेरिगनन प्रमेय क्या है ? इसे सिद्ध कीजिए ।

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