वीन सेतु क्या है?, सिद्धांत, कार्यविधि, लाभ तथा संधारित्र का शक्ति गुणांक ज्ञात कीजिए | Wien’s Bridge in Hindi

वीन सेतु का सिद्धांत

वीन सेतु, संधारित्र की धारिता एवं संधारित्र का शक्ति गुणांक मापने की एक सुविधाजनक विधि है। इसमें अज्ञात संधारित्र का मान, मानक संधारित्र के पदों में ज्ञात किया जाता है।
या कम शब्दों में कहें, तो यह विधि संधारित्र की धारिता ज्ञात करने की विधि है। वीन सेतु का परिपथ आरेख में प्रदर्शित है।

वीन सेतु की परिपथ व्यवस्था

वीन सेतु की परिपथ व्यवस्था को चित्र में दर्शाया गया है इसमें दिए गए संधारित्र को प्रथम भुजा MN में एक अज्ञात धारिता C1 का संधारित्र एक प्रतिरोध R1 के साथ श्रेणीक्रम में लगा होता है। तथा MP में एक मानक परिवर्ती संधारित्र C3 व एक अप्रेरकीय प्रतिरोध R3 श्रेणी क्रम में जुड़े होते हैं। अतः इसमें दो NO तथा OP में अप्रेरकीय परिवर्ती प्रतिरोध R2 व R4 लगे होते हैं। और इसमें भुजा NP में एक “हैडफोन या संसूचक (D)” भी लगा होता है। चित्र-1 में देखें।

और पढ़ें.. मैक्सवेल सेतु क्या है? सिद्धांत कार्यविधि लाभ-हानि लिखिए। Maxwell Bridge in Hindi

वीन सेतु
वीन सेतु

वीन सेतु की कार्य-विधि

प्रत्यावर्ती धारा सेतु के सन्तुलन के व्यापक प्रतिबन्ध से,
\frac{Z_1}{Z_2} = \frac{Z_3}{Z_4} …(1)
अब चित्र के अनुसार,
Z1 = R1 + \frac{1}{jωC_1} , Z2 = R2, Z3 = R3 + \frac{1}{jωC_3} तथा Z4 = R4
समीकरण (1) में यह मान रखने पर,
\frac{R_1 + 1/jωC_1}{R_2} = \frac{R_3 + 1/jωC_3}{R_4}
या R1R4 + \frac{R_4}{jωC_1} = R2R3 + \frac{R_2}{jωC_3} …(2)
दोनों और के वास्तविक एवं काल्पनिक भागों की तुलना करने पर,
R1R4 = R2R3
अथवा
\footnotesize \boxed{ \frac{R_1}{R_2} = \frac{R_3}{R_4} } …(3)

इसी प्रकार,
\frac{R_4}{C_1} = \frac{R_2}{C_3}
अथवा
\footnotesize \boxed{ C_1 = C_3 \frac{R_4}{R_2} } …(4)
अतः “उपर्युक्त व्यंजक से संधारित्र की धारिता C ज्ञात की जा सकती है।”
अर्थात् समीकरण (3) व (4) दो सन्तुलन के प्रतिबन्धों को प्रदर्शित करते हैं, जिन्हें C3 व R3 को एकान्तर क्रम में परिवर्तित करके प्राप्त किया जाता है ऐसा तब तक किया जाता है। जब तक कि हैडफोन या संसूचक ‘D’ में ध्वनि न्यूनतम अथवा विक्षेप शून्य न हो जाए।

वीन सेतु के लाभ

(1). इसकी सहायता से संधारित्र की धारिता ज्ञात की जा सकती है।
(2). इसकी सहायता से संधारित्र का शक्ति गुणांक ज्ञात किया जा सकता है।
(3). यह परिपथ सरल होता है, और इसका मापन शुद्धतापूर्वक किया जा सकता है।

और पढ़ें.. शेरिंग सेतु क्या है? सिद्धांत कार्यविधि लाभ तथा द्रवों का परावैद्युतांक ज्ञात कीजिए। Schering Bridge in Hindi

संधारित्र का शक्ति गुणांक

माना अज्ञात संधारित्र का शक्ति गुणांक –
Cosφ = \frac{R_1}{Z} …(5)

{चूंकि Z = \sqrt{(XC)^2 + R^2_1} = \sqrt{(\frac{1}{ωC})^2 + R^2_1} या Z = \sqrt{\frac{1}{ω^2C^2} + R^2_1} }, तब
Z का मान समीकरण (5) में रखने पर,
Cosφ = \frac{R_1}{\sqrt{1/ω^2C^2 + R^2_1}}
अब यदि R << 1/ωC1, तो R = 0, अतः
Cosφ = \frac{R_1}{1/ωC_1}
या \footnotesize \boxed{ Cosφ = ωC_1R_1 }

अर्थात् शक्ति गुणांक Cosφ = ωC1R1 इस स्थिति में R1 का मान समीकरण (3) से एवं C1 का मान समीकरण (4) से ज्ञात किया जाता है। ω का मान जिस पर सेतु सन्तुलन में होता है ज्ञात होने पर C1 के मान की गणना की जा सकती है।
शक्ति गुणांक से संधारित्र की गुणवत्ता का ज्ञान होता है। शक्ति गुणांक जितना कम होगा उतना ही संधारित्र अच्छा होगा। अर्थात् एक आदर्श संधारित्र के लिए शक्ति गुणांक शून्य होता है।

Note – वीन सेतु से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं।
Q.1 वीन के सेतु की व्याख्या कीजिए तथा इसके लाभ बताइए?
Q.2 वीन सेतु किसे कहते हैं? इसका सिद्धांत, कार्य-विधि तथा इस सेतु के द्वारा शक्ति गुणांक को ज्ञात कीजिए।

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *