वीन का विस्थापन नियम क्या है, ऊष्मागतिकी के द्वारा निगमन कीजिए | Wien’s Displacement Law in Hindi

वीन का विस्थापन नियम

वीन के नियमों को दो भागों में व्यक्त किया जाता है –
1.वीन के विस्थापन नियम के अनुसार, “कृष्णिका का ताप बढ़ाते जाने पर, कृष्णिका से उत्सर्जित अधिकतम ऊर्जा विकिरण निम्न तरंगदैर्ध्य की और विस्थापित होता जाता है।” अर्थात् दूसरे शब्दों में, “ऊष्मा विकिरण की तरंगदैर्ध्य λm, परम ताप T के व्युत्क्रमानुपाती होती है।” अर्थात्
λm = \frac{1}{T} या \footnotesize \boxed{ λ_mT = नियतांक } …(1)
विशेष रूप में, अधिकतम ऊर्जा उत्सर्जन के संगत तरंगदैर्ध्य λm तथा परम ताप T का गुणनफल एक सार्वत्रिक होता है। अर्थात्
\footnotesize \boxed{ λ_mT = b (नियतांक) } …(2)
यहां नियतांक b को “वीन नियतांक” कहते हैं। तथा b का मान 2.9×10-3 मीटर-K या इसका मान 0.2896 सेमी-K होता है। अतः इसे “वीन का विस्थापन नियम (Wien’s displacement law in Hindi)” कहते हैं।
अर्थात् वीन के विस्थापन नियम से सूर्य अथवा तारों का ताप ज्ञात कर सकते हैं। अतः ‘एबट’ के प्रयोगों से, सूर्य के लिए λm = 4753 \AA है।
अतः सूर्य का ताप, T = \frac{b}{λ_m} के सूत्र से,
{चूंकि b = 2.9×10-3 मीटर-K तथा λm = 4753 \AA , या \AA = 10-10} मानों को सूत्र में रखने पर, अर्थात्
T = \frac{2.9×10^{-3} मीटर-K}{4753 × 10^{-10} मीटर}
अर्थात्
सूर्य का ताप \footnotesize \boxed{ T = 6100 K }

और पढ़े… आदर्श कृष्णिका क्या है? फेरी व वीन की कृष्णिका (Blackbody Radiation in Hindi)

2.वीन ने सिद्ध किया कि “किसी ताप T पर उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य λ की अधिकतम ऊर्जा Eλ का मान उस ताप की पांचवी घात T5 के अनुक्रमानुपाती होता है।” अर्थात् दूसरे शब्दों में, “स्पेक्ट्रमी उत्सर्जन क्षमता, परम ताप के पंचम घात के अनुक्रमानुपाती होती है।” अर्थात्
Eλ ∝ T5 या \footnotesize \boxed{ E_λT^{-5} = नियतांक } …(3)
विशेष रूप में, अधिकतम स्पेक्ट्रमी उत्सर्जन क्षमता Em तथा परम ताप T-5 का गुणनफल एक नियतांक होता है। अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_mT^{-5} = B (नियतांक) } …(4)
यहां नियतांक B का मान 2.188×10-4 अर्ग-K-5 होता है।

वीन का विकिरण नियम

अब यदि वीन के विकिरण नियम को ज्ञात करने के लिए हमें इन समीकरणों का उपयोग करते हैं। अर्थात्
समीकरण (1) व (3) से दोनों समीकरणों को मिलाकर लिखने पर,
Eλλ5 = नियतांक या Eλλ5 = Af(λT)
यहां f(λT) गुणनफल λT का फलन है। अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_λdλ = \frac{A}{λ^5} f(λT)dλ } ….(5)
यह समीकरण “वीन के विकिरण नियम” को व्यक्त करता है।

वीन के विस्थापन नियम का निगमन

वीन के नियम का निगमन निम्न चरणों में संपन्न किया जाता है –

(1).λ तथा T के बीच संबंध

माना कि विकिरण की कोई तरंग गोलाकार कोष्ठ की दीवार के बिन्दु M पर अभिलम्ब से θ कोण बनाती हुई टकराती है। तथा अभिलम्ब से θ कोण बनाती हुई MN के अनुदिश परावर्तित हो जाती है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

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वीन का विस्थापन नियम

यदि गोलाकार कोष्ठ का केन्द्र O तथा त्रिज्या r हो, तब
दो क्रमागत परावर्तनों के बीच तरंग द्वारा तय की गई दूरी = MN = 2r cosθ
अतः दो क्रमागत परावर्तनों के बीच लिया गया समय = \frac{2r cosθ}{c}
तथा एक सेकण्ड में परावर्तनों की संख्या = \frac{c}{2r cosθ}
अतः सूक्ष्म समयान्तराल dt में परिवर्तनों की संख्या \frac{c dt}{(2r cosθ)}
यदि समयान्तराल dt में गोलाकार कोष्ठ की त्रिज्या r में परिवर्तन dr हो, तो कोष्ठ की दीवारों का वेग
v = \frac{dr}{dt} या vdt = dr
माना कि समयान्तराल dt में तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन dλ हो, तब
dλ = \frac{2vλ}{c} cosθ × \frac{cdt}{2r cosθ}
या dλ = λ \frac{vdt}{r} = λ \frac{dr}{r}
या \frac{dλ}{λ} = \frac{dr}{r}
अथवा
\frac{dλ}{λ} \frac{dr}{r} = 0 ….(1)
अब समीकरण (1) का समाकलन करने पर,
logeλ – loger = नियतांक
या loge \frac{λ}{r} = नियतांक
अर्थात्
\frac{λ}{r} = नियतांक ….(2)
यदि विकिरण के रुद्धोष्म प्रसार के लिए, TV1/3 = नियतांक
परन्तु गोले का आयतन, V = \frac{4}{3} πr3
अतः T( \frac{4}{3} πr3)1/3 = नियतांक
या Tr = नियतांक ….(3)
अतः समीकरण (2) व (3) से,
\frac{λ}{r} × Tr = नियतांक
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ λT = नियतांक } ….(4)
अर्थात् विकिरण की तरंगदैर्ध्य परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है। “यह वीन के विस्थापन नियम के प्रथम भाग को प्रदर्शित करता है।”

और पढ़े… न्यूटन का शीतलन नियम क्या है? इसे सिद्ध कीजिए। (Newton’s law of cooling in Hindi)

(B).Eλ तथा T के बीच संबंध

अब हम कोष्ठ में तरंगदैर्ध्य λ व λ + dλ के बीच के विकिरणों का ऊर्जा घनत्व uλdλ होगा। अतः इस तरंगदैर्ध्य परास में आयतन V में कुल आन्तरिक ऊर्जा uλ = uλdλV होगी। तथा विकिरण का दाब P = \frac{1}{3} uλdλ होगा।
यदि विकिरण के रुद्धोष्म प्रसार के लिए, ∆Q = 0
अतः ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,
∆Uλ + ∆W = ∆Q = 0
या ∆Uλ + P∆V = 0
या ∆(uλeλdλV ) + \frac{1}{3} uλdλ∆V = 0
या ∆uλdλV + uλ∆(dλ)V + uλdλ∆V + \frac{1}{3} uλdλ∆V = 0
अथवा
∆uλdλV + uλ∆(dλ)V + \frac{4}{3} uλdλ∆V = 0
यदि uλdλV से भाग देने पर,
\frac{∆u_λ}{u_λ} + \frac{∆(d_λ)}{d_λ} + \frac{4}{3} \frac{∆V}{V} = 0
अतः
\frac{∆u_λ}{u_λ} + \frac{∆λ}{λ} + \frac{4}{3} \frac{∆V}{V} = 0 …(5)

{चूंकि \frac{∆(d_λ)}{d_λ} = \frac{∆λ}{λ} रखने पर }
अब यदि V = \frac{4}{3} πr3
तथा ∆V = \frac{4}{3} π(3r2)∆r = 4πr2∆r
अतः \frac{∆V}{V} = 3 \frac{∆r}{r}
अथवा समीकरण (1) से,
\frac{∆λ}{λ} = \frac{∆r}{r}
अब यदि \frac{∆λ}{λ} तथा \frac{∆V}{V} के मान समीकरण (5) में रखने पर,
\frac{∆u_λ}{u_λ} + \frac{∆r}{r} + \frac{4}{3} × 3 \frac{∆r}{r} = 0
या \frac{∆u_λ}{u_λ} + 5 \frac{∆r}{r} = 0
समाकलन करने पर,
logeuλ 5loger = नियतांक
या logeuλr5 = नियतांक
या uλr5 = नियतांक
अर्थात् समीकरण (3) से,
Tr = नियतांक
अतः uλT-5 = नियतांक
परन्तु
Eλ ∝ uλ
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_λT^{-5} = नियतांक } ….(6)
अर्थात् स्पेक्ट्रमी उत्सर्जन क्षमता परम ताप के पंचम घात के अनुक्रमानुपाती होती है। “यह वीन के विस्थापन नियम के द्वितीय भाग को प्रदर्शित करता है।”

Note – वीन के विस्थापन नियम से सम्बन्धित प्रशन परिक्षाओं में पूछें जाते हैं।
Q. 1 वीन का विस्थापन नियम क्या है ? ऊष्मागतिकी के आधार पर इसका निगमन कीजिए ?
Q. 2 कृष्ण पिण्ड विकिरण के स्पेक्ट्रमी के लिए वीन का विस्थापन नियम बताइए तथा इसमें सभी नियतांकों के मात्रक तथा मानों को लिखिए ?
Q. 3 सिद्ध कीजिए कि किसी वस्तु का ताप धीरे-धीरे बढ़ाने पर पहले वह लाल रंग की ही क्यों दिखाई पड़ती है ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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