प्रत्यास्थता गुणांक क्या है, यंग, आयतन, दृढ़ता गुणांक क्या है | परिभाषा, सूत्र, मात्रक लिखिए

समांगी व समदैशिक पदार्थ

“समांगी तथा समदैशिक वे पदार्थ होते हैं। जिनके गुण पदार्थ के सभी बिंदुओं पर तथा सभी दिशाओं में समान होते हैं। ऐसे पदार्थों में प्रत्यास्थता का गुण सभी दिशाओं में समान होता है। सभी ठोस प्रायः समांग व समदैशिक नहीं होते हैं।”

उदाहरण – लकड़ी, क्रिस्टल ओर क्रिस्टल संरचना वाली धातुएं असमांगी एंव विषमदैशिक होती हैं।

समांगी व समदैशिक पदार्थों के निम्नलिखित 4 प्रत्यास्थता गुणांक होते हैं।

1.यंग प्रत्यास्थता गुणांक क्या है

प्रत्यास्थता की सीमा के अंदर, अनुदैर्ध्य प्रतिबल और संगत विकृति के अनुपात को वस्तु के पदार्थ का “यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young’s Elasticity Coefficient in Hindi)” कहते हैं। इसे Y से प्रदर्शित करते हैं।

यदि A अनुप्रस्थ परिच्छेद के तार पर F बल लगाने से उसकी लंबाई L से (L+l) हो जाती है। तो

यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y = \frac{प्रतिबल (F/A)}{विकृति (l/L)} अतः

Y = \frac{F.L}{A.l} …..(1)

यहां Y, K तथा η में से प्रत्येक के लिए मात्रक न्यूटन/मीटर2 है।

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2.आयतन प्रत्यास्थता गुणांक क्या है

जब किसी ठोस या तरल (द्रव्य अथवा गैस) पर दाब में परिवर्तन किया जाता है। तो इसका आयतन बदल जाता है। परंतु रूप वही रहता है। इस प्रतिबल और आयतन विकृति कि दर को वस्तु के पदार्थ का “आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Volume Elasticity Coefficient in Hindi)” कहलाता है तथा इसे K से प्रदर्शित करते हैं।

यदि प्रारंभिक आयतन V पर दाब P लगाने से आयतन में परिवर्तन v हो जाता है। तो-

आयतन प्रत्यास्थता गुणांक K = – \frac{प्रतिबल (p)}{आयतन की विकृति (v/V)} अतः

K = – \frac{pV}{v} ….(2)

यहां Y, K तथा η में से प्रत्येक के लिए मात्रक न्यूटन/मीटर2 है।

3.अपरूपण का दृढ़ता गुणांक क्या है

प्रत्यास्थता की सीमा के अंदर स्पर्शीय प्रतिबल और अपरूपण की विकृति का अनुपात “दृढ़ता गुणांक (Firmness Coefficient of shear in Hindi)” कहलाता है। तथा इसे η से प्रदर्शित करते हैं।

दृढ़ता गुणांक
दृढ़ता गुणांक

एक घन के दो फलक दिखाए गए हैं। एक स्पर्शीय बल F ऊपर वाली सतह पर लगाया गया है। तथा नीचे वाली सतह कसी हुई है। तो बल युग्म के कारण –

MM’ = NN’ = l या MP = NO = L, अतः

दृढ़ता गुणांक η = \frac{अपरूपण का प्रतिबल (F/A)}{(अपरूपण की विकृति φ = l/L)}

η = \frac{F}{Aφ} ….(3)

यहां Y, K तथा η में से प्रत्येक के लिए मात्रक न्यूटन/मीटर2 है।

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4.पाइसन अनुपात क्या है

जब किसी तार पर उसकी लंबाई की दिशा में बल लगाया जाए, तो उसकी लंबाई बढ़ती है। तथा उसका व्यास कम होता है। तथा वस्तु के पदार्थ के लिए दोनों अनुपात नियत होता है। इस स्थिरांक को “पाइसन अनुपात (Poisons Ratio in Hindi)” कहते हैं। इसे σ से प्रदर्शित करते हैं।
यदि अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य विकृतियां β तथा α है। तो

σ = \frac{β}{α} , अतः

α = \frac{l}{L} , β = \frac{d}{D} , σ = \frac{β}{α} = \frac{L}{l} \frac{d}{D} इसलिए,

σ = \frac{L}{D} \frac{dD}{dL} ….(4)

इसका कोई मात्रक नहीं होती है।

प्रत्यास्थता गुणांक Y, K, η व σ के बीच संबंध ज्ञात करों

1. Y, K तथा σ में सम्बन्ध :- माना एक घन MNOPQRST है जिसकी भुजा एकांक लम्बाई की है। एक बल F इससे प्रत्येक फलक पर लम्बवत् और समान रूप से बाहर को कार्य कर रहा है।

Y, K तथा σ में सम्बन्ध
Y, K तथा σ में सम्बन्ध

यदि बल की तरफ एकांक तनाव की वजह से एकांक लंबाई में वृद्धि α हो, तो –

प्रत्येक किनारे पर वृद्धि Fα होगी ।
MN = 1 + Fα – Fβ = 1 + F(α – 2β)

इसी प्रकार,
NR = 1 + F(α – 2β)
NO = 1 + F(α – 2β)

अतः घन का अन्तिम आयतन
MN × NR × NO = [1 + F(α – 2β)]3

MN × NR × NO = [1 + 3F(α – 2β)]
(बाइनोमियल प्रमेय की सहायता से), इसलिए,

आयतन में परिवर्तन = अन्तिम आयतन – प्रारंभिक आयतन

आयतन में परिवर्तन = 1 + 3F(α – 2β) – 1, में परिवर्तन = 3F(α – 2β)

आयतन विकृति = \frac{3F(α - 2β)}{1}
= 3F(α – 2β)

अतः आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (K)
K = अभिलम्ब प्रतिबल/आयतन विकृति

K = \frac{F}{3F(α - 2β)}

K = \frac{1}{3(α - 2β)}

K = \frac{1/α}{3(1 - 2β/α)}

{चूंकि प्रतिबल = 1}

तो रेखीय विकृति = \frac{α}{1}

Y = \frac{प्रतिबल}{विकृति} = \frac{1}{α}

साथ ही \frac{β}{α} = σ (पाइसन अनुपात)

\footnotesize \boxed{K = \frac{Y}{3(1 - 2σ)}}
या
\footnotesize \boxed{Y = 3K(1 -2σ)} …..(1)

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2. Y, η तथा σ में सम्बन्ध :- जैसा की चित्र में दर्शाया गया है। कि एक L भुजा के घन के समान का फलक MNOP दिखाया गया है।

Y, η तथा σ में सम्बन्ध
Y, η तथा σ में सम्बन्ध

तथा नीचे फलक OP को स्थिर करके ऊपर के फलक MN पर स्पर्शीय बल F लगाया जाता है। इस बल के कारण घन θ कोण से M’N’OP रूप में अपरूपित होता है।
अपरूपण की विकृति-

θ = \frac{M'M'}{MP}

θ = \frac{N'N'}{NO}

θ = \frac{l}{L}

अपरूपण का प्रतिबल
T = \frac{F}{L^2}

अतः दृढ़ता गुणांक
η = \frac{T}{θ}

यदि α, β अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ दिशाओं में एकांक तनाव के लिए विकृतियों के मान हैं, तो अतः

ON कर्ण की सम्पूर्ण वृद्धि = ON T(α + β)
= L \sqrt{2} T(α + β)

अतः ∠MNP = 90° लगभग तथा ∠NN’R = 45° लगभग
इसी प्रकार,
RN’ = NN’ Cos45°
RN’ = \frac{NN'}{ \sqrt{2}}

RN’ = \frac{l}{ \sqrt{2}}

RN’ = L \sqrt{2} T(α + β) = \frac{1}{ \sqrt{2}}

या T \frac{L}{L} = \frac{1}{2(α + β)}

T \frac{L}{l} = \frac{T}{l/2} = \frac{T}{θ} = η

इसलिए,
η = \frac{1}{2(α + β)}

η = \frac{1}{2α(1 + β/α)}

परन्तु, \frac{β}{α} = σ तथा Y = \frac{प्रतिबल}{विकृति} = \frac{1}{α} इसलिए,

\footnotesize \boxed{η = \frac{Y}{2(1 + σ)}}
या ‌
\footnotesize \boxed{Y = 2η(1 + σ)} ….(2)

3. Y, K और η में सम्बन्ध :- समीकरण,

(1 – 2σ) = \frac{Y}{3K} …(a)
(2 + 2σ) = \frac{Y}{η} ….(b)

दोनों समीकरणों को जोड़ने पर,
3 = \frac{Y}{η} + \frac{Y}{3K}

3 = Y( \frac{1}{η} + \frac{1}{3K} )

3 = Y \frac{(3K + η)}{3ηK}

अतः इसी प्रकार,

Y = \frac{9ηK}{(3K + η)}

इस प्रकार लिखने पर,
\frac{9}{Y} = \frac{(3K + η)}{ηK}

\footnotesize \boxed{\frac{9}{Y} = \frac{3}{η} + \frac{1}{K}} ….(3)

4. Y, K और σ में सम्बन्ध :- समीकरणों,

Y = 3K (1 – 2σ) ….(a)
Y = 2η (1 + σ) …..(b)

Y के दोनों मानों को समान रखने पर,

3K (1 -2σ) = 2η (σ)

3K – 6Kσ = 2η + 2ησ

या σ (2η + 6K) = 3K – 2η

तो \footnotesize \boxed{σ = \frac{(3K - 2η)}{(2η + 6K)}} …..(4)

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σ के चरम मान (Limiting Values of σ in Hindi)

समीकरण (a) तथा (b) से,

3K (1 – 2σ) = 2η (1 + σ)

जिसमें K और η तो आवश्यक रूप से धनात्मक राशियां ही है अतः

(1). यदि σ एक धनात्मक राशि है :- तो समीकरण का दायां भाग धनात्मक होगा तथा इस कारण बायां भाग भी धनात्मक ही होना चाहिए। यह तभी संभव है। जबकी
1 – 2σ > 0 < \frac{1}{2} या 0.5

(2).यदि σ ऋणात्मक राशि है :- तो समीकरण का बायां भाग धनात्मक हो जाता है। और इस कारण दायां भाग भी धनात्मक ही होना चाहिए‌। इसके लिए,
1 + σ > 0 या σ > – 1

अतः सैद्धांतिक रूप से σ का मान -1 और 0.5 के बीच होता है। अर्थात्

– 1 < σ < 0.5

अतः इन समीकरणों को σ के चरम मान कहलाते हैं।

Note – प्रत्यास्थता गुणांकों से संबंधित प्रश्न –
Q.1 समांगी व समदैशिक पदार्थ के कौन-कौन से विभिन्न प्रत्यास्थता गुणांक हैं। इन्हें परिभाषित कीजिए? तथा इनमें परस्पर संबंध स्थापित कीजिए।
Q.2 सम्बन्ध Y = 3K(1 – 2σ) तथा Y = 2η(1 + σ) की स्थापना कीजिए।
Q.3 प्रत्यास्थता गुणांक Y, K, η व σ के बीच संबंध को स्थापित कीजिए।
Q.4 यंग प्रत्यास्थता गुणांक तथा आयतन प्रत्यास्थता गुणांक को परिभाषित कीजिए तथा सूत्र भी दीजिए?

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